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Poems

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सुना हां दोस्ता
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सुना हां दोस्ता

Susheel Begana

लिछकदा टोका सुना हां दोस्ता। राग कोई औखा सुना हां दोस्ता। मैं मिरी दी मैं गुआची जा कुतै हादसा ओहका सुना हां दोस्ता। पक्कियें रफ़लें दा रौला बंद कर , फैर कोई फोका सुना हां दोस्ता। मौकियां सुनदे पकाए…

30 Apr 2015 7
चादर
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चादर

Susheel Begana

ङार कलावै भरने पौंदे। ठार सिआले ठरने पौंदे। अपना ढंडा आपूं फूकी , जालो खाले जरने पौंदे। जीन दुहारा मूंढै चुक्की सौ सौ मरने करने पौंदे। मुंडी झिगड़ी करनी पौंदी मत्थे पैरें धरने पौंदे। चादर जिस'ले लौहकी…

21 Mar 2015 6
ग़ज़ल‏
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ग़ज़ल‏

Susheel Begana

करूँ हीला मने तेरे दियां अस बी मना करचै ! एह मारू कारखाने फ्ही मुड़ी जीन्दे गरां करचै ! उठी आया ऐ सूरज होर नेड़ै सैन्स आखा दी चलो सुखने दे फन्गेँ कूलियेँ रीझें गी छाँ करचै ! गलान्दे आरदे जरमें शा ए घोडे…

18 Mar 2015 26
Reflection [Translated In English by Suman K. Sharma]
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Reflection [Translated In English by Suman K. Sharma]

Susheel Begana

Original Dogri poetry is available here My own mirror perhaps Finds me a stranger still – Lost for centuries as I am In the quest of self. These my eyes await A closer look at me – I haven’t yet…

4 Oct 2013 1,079
A Sonorous Song [Translated In English by Suman K. Sharma]
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A Sonorous Song [Translated In English by Suman K. Sharma]

Susheel Begana

Abjure the clamorous beats of hate And join in the chorus of love, O Mate! Of death have we sung far too long - Come, hum now life’s sonorous song! Why do you fathom love’s lake? Raise your arms, a…

4 Oct 2013 4,502
Gift of Blessings
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Gift of Blessings

Champa Sharma

Gift Packed with Blessings Tell me, serviceman, where you are I want to send you a gift Packed with my blessings You do not have a regular address One day you are in Reasi and the next in Pulwama You…

4 Oct 2013 1,721
गज़ल
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गज़ल

Bishan Singh 'Dardi'

उड्डने दी तांह्‌ग रेही मनै दे बोआल बी, हौसलें दे फंघ भन्ने घरें दियें तंग्गियैं । तांह्‌गां कदैं मनै दियां होइयां गै निं पूरियां, धोना केह् हा, रेड़ना, सकाना केह् हा नंग्गियैं । ढोई-ढोई जिंदगी दा भार…

4 Oct 2013 844
चौथा पहर
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चौथा पहर

Shashi Pathania

रात का यह चौथा पहर, राधा के लिये , जैसे ज्येष्ठ- आषाढ़ की शिखर दुपहर । तीन पहर बीत गये काहना के हुए दीदार, रात का यह चौथा पहर , राधा पर ढाता कहर। रात का यह चौथा पहर, रुक्मणि सोई , जैसे बेच शहर- बाज़ार ।…

26 Sept 2013 504
रिश्ता
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रिश्ता

Shashi Pathania

बादल बरसा पानी बहा जल-थल एक हुआ धरती ने सहा , अपने सूरज की अमानत मान अपने अंदर भरा। लौटाने की जन्मजात वृत्ति से प्रेरित सृजन में रत्त अपने हृदय से लगा कर फिर लौटा कर हो जाएगी तृप्त सूरज से अपना…

26 Sept 2013 538
संयोग
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संयोग

Shashi Pathania

यह संयोग ही तो एक ईज़ाद की मानिंद, कि चैट-रूम में बिना किसी रंग,रूप और शिनाखत के तुम मुझे मिले थे। और मुझे सोचने पर मजबूर कर गया था तुम्हारा यह कहना कि --- खाली दिमाग शैतान का घर होता है। क्योंकि…

26 Sept 2013 485
मेरा चाँद
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मेरा चाँद

Shashi Pathania

डूबते सूरज से नज़र मिलते ही, इशारा समझते ही , विदा होते सूरज की लाली , उसकी समझ में आ गई । और वह लजाकर , छुईमुई सी शर्मा कर , आँखें मींचकर , उस ओर मुँह कर गई । जिधर से उसके चाँद ने है चढ़ना, भेस बदल,…

26 Sept 2013 498
रात दी रानी
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रात दी रानी

Shashi Pathania

राती दी बुक्कली च सुत्ती दी कञका दी अक्ख खु'ल्ली कच्छ-कोल अश्कें कुतै अतरै दी शीशी डु'ल्ली । कञका ने माऊ गी पुच्छेआ---- मां ,एह् केह् झुल्लेआ जे रात उट्ठी मैह्‌की । मां बोल्ली , बड़ी सरगोशी नै भेतली…

26 Sept 2013 597

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